शिकायत
मुझे शिकायत है आज के दोहरी सोच वाले समाज से
आज के समाज मे लड़कियों को सभी अधिकार दिए जाने लगे है लेकिन उन्हें अधिकारों की सीमाओ की बेड़िओ से जकड दिया गया है वैसे तो कहने को हमारा समाज खुला हुआ है पर आज भी यहाँ लड़कियों को लड़को से कम समझा जाता है लड़को को सारी आजादी है पर वही लड़कियों को समय के दायरे में बांध दिया है , आखिर क्यों समाज के सभी नियम ,कानून , रीति रिवाज लड़कियों के लिए बनाये जाते है उन्हें ही ये बताया जाता है की उन्हें ही घर परिवार का मान सम्मान बना के रखना है उन्हें अपनी ज़िंदगी से से समझोते के लिए मजबूर किया जाता है / लड़के लड़कियों को परेशान करते है उनकी भावनाओ को आहत है फिर भी समाज सारा दोष लड़कियों पर ड़ाल दिया जाता है पेरेंट्स लड़कियों अगर आजादी देने की कोशिश भी करे लेकिन हमारा समाज उन्हें ये करने नहीं देगा पेरेंट्स भी ये सोचने पर मजबूर हो जाते है की हमे समाज की हिसाब से अपनी लड़कियों को पलना होगा / जब किसी लड़की की शादी होती है उस समय भी लड़कियों को ही सभी रस्मे निभानी पड़ती है लड़की के घरवालो को भी उन सब के सामने सर झुकाना पड़ता है इसकी वजह समाज है समाज ही लड़के के घरवालो को छूट है की वह लड़की के घरवालो से कुछ भी करवा सकते है ताजुब की बात तो तब होती है जब एक लड़की के पिता होने के बावजूद भी वह दूसरी लड़की की इज्जत नहीं करता उसे अपने घर की नौकरानी समझता है /
कल तक की एक आजाद पंछी आज किसी के घर के पिंजड़े में कैद हो जाती है कल खुले आसमान में उड़ना चाहती थी लेकिन उसको आसमान को ठीक तरह से देखना भी नसीब नहीं होता एक एक करके पूरा साल निकल जाता है लेकिन ज़िंदगी कुछ नयापन महसूस नही होता क्योकि वह घर परिवार की ख़ुशी और दुसरो की चिंता में इस कदर व्यस्त हो जाती है की अपने लिए वक्त ही नहीं बचता अपनी जरुरत अपनी पसंद न पसंद को कभी समझने की कोशिश नहीं करती कभी अपनी सखियो से कहती थी "मैं अपनी फेवरिट हूँ" दुसरो की पसंद की चीज़ो में उलझ जाती है कभी हवा से बाते करती उसे महसूस करती लेकिन आज हवा आने पर खिड़कियों बंद करने में लग जाती ज़िन्दगी की सभी तकलीफो को झेलने के लिए तैयार रहती है हमारा समाज उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर देता है इतना सब करने के बाद भी उन्हें वो सम्मान प्यार नहीं मिलता किसी के चेहरे परं खुशी देखने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है लेकिन अपनी ख़ुशी का क्या आखिर क्यों समाज सभीबलिदान लड़कियों से मागता है क्यों लोग नही समझते की उनकी भी कुछ मांगे है उन्हें भी रहने का हक़ है हवा को महसूस करने का आसमान को छु जाने का हक़ है लेकिन अब समाज को बदलना होगा उन्हें भी आजादी देनी होगी खुद की पहचान होगी और समाज उस पर गर्व करेगा और वह अपने अनुसार ज़िंदगी जियेगी
मोनिका
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