Wednesday, 8 April 2015

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झाड़ू 

झाड़ू  भी  बड़ी अजीब चीज़ है न  सोचने और समझने के लिए वैसे  तो
 हम लोग इतने बिजी रहते है  की सबके पास टाइम ही कहा है इन  सब चीज़ो के बारे में  धयान   देने    के  लिए इस भागती हुई  जिंदगी  में  हम सब झाड़ू जैसी अनेक चीज़ो पर ध्यान नहीं देते सच  तो ये भी है  की  झाड़ू के बिना  हम  सब का घर कूड़ा घर  बन  जायेगा।
                    जिस प्रकार  हम घर को साफ़ और सुन्दर  बनाये रखने के लिए झाड़ू का  प्रयोग  करते  है पर क्या हम समाज   में पल रही उस गन्दगी के बारे सोचते है जो हमारे समाज को अंदर ही अंदर  खोखला  कर   रही है.. जिस तरह से हम अपना घर  साफ़ कर कूड़ा बाहर लगा देते है    ठीक  उसी तरह समाज में हो रहे  भरष्टाचार    अनन्याए  के प्रति अपनी आँखे बंद कर लेते है। आज लोग अपने और अपनों के बारे में सोचते है जिस तरह से हमने झाड़ू को अपने घर की सीमा में बांध रखा है  ठीक उसी तरह समाज हमे संस्कीरति का हवाला  देते हुए  पुरानी  बातो की जंजीरो से जकड रखा है  हम   जैसे युवाओ को इन समाज की गन्दगी को साफ़ करने के लिए  झाड़ू रूपी एकता  उत्पन्न  करनी होगी जिससे  हम समाज की अनचाही मांगो को नकार सके और  समाज   में पनप रही गन्दगी का सफाया कर सके पर क्या ऐसा हो पायेगा  या नही  समाज में हो रहे अत्याचार और रैप  जैसे अपराधो  को गंभीरता से  लेते है इन अपराधो को देखते और समझते है  पर कुछ न कर पाने की वजह से बस युही भूल जाते है  क्योकि हमारी बातो को और आक्रोश  को दबाने के लिए एक  नही हजारो बैठे हुए है  जिनके चुटकी बजाते ही सारा खेल ख़त्म हो जाता है और सब अपनी जिंदगी में फिर से व्यस्त हो जाते है एक एक  दिन करके पूरा साल निकल जाता है   पर  समाज में कुछ नया पन   महसूस नही होता आज हम बदलतै हुए समाज में रह रहे    है    पर कुछ बदला नही न  हां  कुछ  चीज़े है जो बदल गई है जैसे हमारे  रहने के ढंग   पर   हम सभी को  मिलकर एक नई    सोच बनानी होगी जिससे हम समाज में रह रहे लोगो की  उम्मीद बन सके जो लोग अभी भी न्याय की आस लगा कर बैठे हुए है  जिस तरह से हम घर की   सफाई कर  पुरे   घर का वातावरण    स्वछ कर देते है   ठीक  उसी तरह से हमे समाज की    हर बुराई का सफाया कर समाज का वातावरण को स्वच्छ  कर सकते है 
                               ऐसा करके   हम  समाज में आने वाले नई जनरेसन को समाज की  नई  किरण से वाक़िफ़ करा सकते है  और बता सकते है की  कोई भी चीज़ छोटी नहीं होती    समाज का हर एक इंसान इम्पोर्टेन्ट है जिस तरह से  झाड़ू  का महत्त्व है ठीक उसी तरह हर छोटे बड़े सभी व्यक्ति का अस्तित्व है। 

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