Monday, 20 April 2015

aansu

आँसू 

आँसू  भी  बड़े  अजीब होते है कभी ख़ुशी में तो कभी गम में आते है  ख़ुशी में आते तो हमेशा याद आते है पर  जब   गम में आते है तो उनको  याद करने का मन नही करता जब कोई तकलीफ अंदर ही अंदर होती है  तब बड़ी अजीब सी फीलिंग होती है  मन तो करता है आज जी भर के इन आसुओ को निकाल  दू पर इन आसुओ  से किसी और को दुखी नहीं कर सकते।  जब  भी रोने का मन करता है तो  हमेशा  कोना देखना पड़ता  फिर माँ भी पूछती है क्या  हुआ फिर  किसी तरह से हम कह देते है कुछ नही माँ सब एक दम मस्त है और जब दोस्तों की नजर पड़ती है तो वो पूछते है क्या हुआ मूड क्यों खराब है बस यही कह देते है नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है       
 पर क्या वाक़ई में ऐसा होता है   हम कुछ तो कहना चाहते है ;अपने मन की सारी बात निकाल देना चाहते है बस दिल में एक दर्द  सा  रहता है  किसी के गले लग कर  बयाँ   करना चाहते है पर बस यूही रुक जाते है उन आसुओ को अपनी आखो में छुपा कर एक स्माइल सा  लुक  देते हुए आगे बढ़ जाते है   किसी को पता नहीं चल पाता की उस हँसते चेहरे के पीछे एक दर्द से भरा चेहरा है जो सबसे छुपा है बस रात में याद आती है वो सारी बाते  जिन्हे बस यूही  भूलना नही चाहते वो चाहे जितना भी दर्द देती हो फिर वो ही सॉन्ग   बजता है जिसमे हम खुद को पाते है 



 आंसू  भी बड़े अजीब चीज़ है 
जिनके पास नही वो बड़े खुशनसीब  है 
 दुनिया के किस्से भी अजीब है 
खुशी  मिले या गम सबका अपना अपना नसीब है


No comments:

Post a Comment