पहिया क्या कभी किसी ने ये सोचा है की एक पहिये का हमारी जिंदगी में
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| ज़िन्दगी |
क्या इम्पोर्टेन्ट है पहिये के द्वारा ही हम एक जगह से दूसरी जगह पर बड़ी आसानी से पहुँच जाते है पर उसकी तरफ बस युही ध्यान नहीं देते जिस प्रकार पहिया घूमता है ठीक उसी प्रकार हमारी जिंदगी का चक्र चलता है। एक पहिये को न जाने कितने मोड़ मिलते है और न चाहते हुए भी उसे उन मोड़ से गुजरना पड़ता है ऐसे ही हमारी कुछ जिंदगी है हमे भी अनेक मोड़ मिलते है और हमे भी उन मोड़ो पर न चाहते हुए भी चल देते है कभी घर के लिए तो कभी इश्क़ के लिए बिना अंजाम जाने बस युही उन रास्तो के लिए निकल पड़ते है जिनकी राहे हमसे बिल्कुल अनजान होती है और जब हम वहा की हवा जब से रूबरू होते है तो एक अलग सी फीलिंग होती है पहिया भी ऐसे ही कई मोड़ पर गुजरा होगा और उसने भी सभी जगह को महसूस किया होगा पहिया रूपी चक्र हमारी जिंदगी से जुड़ा हुआ है जिस तरह हम पुराने रास्तो से गुजर कर नए रास्तो की तरफ चल देते है उन रास्तो पर मिलने वाले सभी चीज़ो को महसूस करते है और देखते ही देखते वो हमारे लिए यादे बन जाती है और समय के साथ सभी यादे धुँधली पड़ जाती है और उन सभी बातो को महसूस करके ख़ुशी का अनुभव करते है और अच्छी यादो को संजो कर रख लेते है जिस तरह पहिये को अपनी मंजिल का पता नहीं होता पर एक न एक दिन वह अपनी मंजिल पर पहुंच जाता है और सड़को की राहो पर चलते चलते घिस कर टूट जाता है ठीक उसी तरह हम जिंदगी की राहो में भटकते भटकते अपनी मंजिल पर पहुंच जाते है और एक दिन इस शरीर को छोड़ कर मिटटी में मिल जाते है मुझे लगता है शायद आप समझ पाए होंगे जिंदगी और पहिये की इस अनोखी कहानी को की किस तरह पहिया और जिंदगी चलते है और कितनी मुस्किलो का सामना करते हुए अपनी मंजिल पर पहुँचते है
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