Saturday, 15 August 2015

जश्न -ए -आजादी 



आजादी हमने अपने प्यारो के खून से पाई है ,
इस आजादी के लिए हमारे अपनों ने छाती पर कई गोलिया खाई है। 

जब अंग्रेजो ने हम हिन्दुस्तानियो पर कई गोलिया बरसाई थी ,
भूल गए क्या , तब   अपनों ने मिलकर खून की होली मनाई थी। 

इन जालिमो ने जाने कितनो को फासिया चढाई थी ,
तब उन जवानो ने मिलकर इनकी हस्ती मिटाई थी। 

तब जाके हमने ये आजादी पाई थी।

 लेकिन आज फिर घिर चुके है ,
हम इन भ्ष्टाचारो की जंजीरो में ,

कर रहे है ये खोखला , हमारे देश को  बड़े पैमानों में ,
अब हमे होश में आना होगा , इन भ्र्ष्टाचारियो को सबक सीखना होगा। 

लो आज हमने ये कसम खाई है ,

सुनो जालिमो, 
याद करो वो इतिहास , जब इस देश में किसी ने  हद पार लगाई है 

तो हमारे देश के जवानो ने मिलकर उनकी हस्ती 
मिटाई है। 

                     







15 August

मुबाकें आजादी 


जब सभी धर्म के लोग अपने अपने मजहब के त्यौहारो को मानते है तो क्यों न हम सब मिलकर उन्ही त्यौहारो की तरह देश की आजादी का दिन मनाये क्यों रखे किसी से भेदभाव कुछ लोग जो हमारे समाज में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई का ताता  लगाये रहते है असल में वो लोग अपने मजहब पर इल्जाम लगाते है हम एक वतन है। ये सब जानते है। पर ऐसा क्यों कुछ लोग मजहब के नाम पर एक दूसरे का नामो  निशान मिटाने को तैयार हो जाते है।  जब हमारा देश उन फिरंगियो की बेड़ियों में फसा हुआ था। जाने कितने जुल्म  उन लोगो ने हम पर बरसाए थे।  तब किसी ने ये नहीं सोचा होगा की हम इस धर्म के है या इस मजहब के सबके मन में एक जूनून   था  आजादी का।  अपने मुल्क पर मिट जाने को तैयार उस वक़्त जाने कितनो की साँसे थमी थी।  तब हमे खुली हवाओ में सॉस  लेने का मौका मिला  था। तो क्यों आज हम अपने मजहब के नाम पर इस तरह लड़े जा रहे है अपने इस धर्म और मजहब की जंजीरो से आजाद होकर सभी को एक साथ मुबारकें आजादी की बधाई देनी होगी। 






जय हिन्द 
जय भारत 







Tuesday, 11 August 2015

मेरे पापा 



मैं और मेरे पापा हर ख्वाब में पापा का सर गर्व से ऊचा करने की चाह पर क्या ऐसा हो पाया  बचपन में न गोद  में खिलाया और न प्यार से सहलाया  पापा की  तीखी  नजरो ने मुझे हर पल है  डराया पापा के आते ही ख़ुशी का एक  पल भी नजर न  आया।   बस  कुछ ऐसी ही  मेरी  और मेरे पापा की कहानी----------------

वैसे तो पापा हर बेटी के जीवन का आधार होते है  पर मेरे पापा बचपन से एक डर  था कही पापा को ये बात या ऐसी शरारत बुरी न लग जाए न कभी उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाया और न कभी पढ़ाया।  दिन और रात एक जैसे लगते थे एकदम सुने और न कही हसी का एक पल कुछ ऐसे ही बीता मेरा बचपन दुसरो के पाप बेटी के बालो को सवारते है पर मेरे पापा मेरे बालो को खुला देखकर काट दिया। 
ऐसा ही एक दिन था जब वो सब मुझे बंद अँधेरे घर में छोड़ कर चले गए।  उस नन्ही सी गुड़िया का क्या कसूर , सीख गयी अंधेरो में रहना खिड़कियों और दरवाजों से बाते करना , सीख गयी जमीन पर खाना खाना , सीख गयी अकेले रहना।  पर किसी से कोई शिकायत नहीं थी।  याद है मुझे वो दिन जब  पापा ने मुझे छोटी सी गलती पर बहुत मारा था  की अब तो पापा के नाम से ही डर लगने लगा हर पल यही डर  था की कही कुछ हो न जाए ,
ऐसी ही वो घडी  थी जब पापा ने मुझे अपनी बेटी कहने से नकारा। 
उस दिन दिल से आवाज आई   क्या ऐसे ही होते है पापा 



वो यही कह रही थी मुझसे------------------------



हमारे देश के गौरव डॉक्टर अब्दुल कलाम  को हमारा सलाम 



सपने वो नहीं जो सोने के बाद आये 
सपने तो वो है जो सोने न दे 

डॉक्टर अब्दुल कलाम जिनका बचपन कई प्रकार की कठिनाइयों से बीता न जाने उन्होंने अपने जीवन में कितने कष्ट झेले पर फिर भी उनमे इतना साहस था की जो वो अपने जीवन से चाहते थे उन्होंने वो हासिल किया।  तमिलनाडु की रामेश्वरम की गलियो में हुआ था इनका जन्म बचपन से ही बड़े प्रतिभा शाली थे। उनके मन में एक दृढ विश्वास था जो वर्तमान समय के युवाओ  धुंधला सा गया है आर्थिक कठिनाइयों के वाबजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई  के लिए घर घर जाकर अखबार बेचा। उनका सपना  पायलेट  बनना था जो साकार नहीं हो सका।  शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।  कलाम जी लालटेन की  रोशनी में जीवन की रोशनी की खोज में दुबे रहते थे।  जीवन में इतनी लगन ने उन्हें अपनी मंजिल पर पंहुचा दिया।  और वे भारत के ११ वे राष्ट्रपति के पद पर शोभित हए।  और उन्होंने अपनी  इस कड़ी मेहनत और लगन   से भारत को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए कई मिशाइले  बनाई।   डॉक्टर अब्दुल कलाम जी को बच्चो से बड़ा प्रेम था।  इनका जीवन ही सबके लिए एक मिशाल थी। जो आज कल कही खोती  जा रही है  जीवन में आर्थिक और समाजिक कठिनाइया तो आती रहती है पर आज कल के किशोर और युवाओ में इतनी कम सहन शक्ति है की जीवन में कुछ घटना हो जाने पर जीवन से निराश और हताश हो जाते है और अपने उद्देश से भटक जाते है।  दृढ़  निश्चय और आत्मविश्वास की मानो एक कमी सी है  सभी एक दूसरे पर निर्भर रहना चाहते है।  डॉक्टर अब्दुल कालम जी का जीवन सघर्षो से भरा हुआ था।   कलाम जी एक अच्छे देश भक्त थे।    उनके जीवन का हर पल भारत को समर्पित था। वो चाहते थे की  भारत के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करके जिंदगी की हर तरक्की और  हर मुकाम हासिल करे।  डॉक्टर कलाम  जी ने अपनी पुस्तक " भारत " में भारत देश को २०२० तक  आधुनिक बनाने की योजना बनाई थी।  कलाम जी ने  कहा   था की उनकी मृत्यु के दिन अवकाश घोषित न किया जाए उनका हर कदम भारत देश को एक नई दिशा दे गया।   भारत देश को उन्होंने एक न्यूक्लिअर देश बना दिया।  वो भारत के एक अच्छे नागरिक साबित हुए।   भारत के इस अनमोल रत्न को भारत देश ने खो दिया। 


खुदा ने ये वादा नहीं किया , की  आसमान नीला होगा 
सुकून की राहो में दुःख का नजारा न होगा 
जीवन में नए सवेरे तो आएंगे 
 पर उन सवेरो के साथ घना अँधेरा न होगा