जश्न -ए -आजादी
आजादी हमने अपने प्यारो के खून से पाई है ,
इस आजादी के लिए हमारे अपनों ने छाती पर कई गोलिया खाई है।
जब अंग्रेजो ने हम हिन्दुस्तानियो पर कई गोलिया बरसाई थी ,
भूल गए क्या , तब अपनों ने मिलकर खून की होली मनाई थी।
इन जालिमो ने जाने कितनो को फासिया चढाई थी ,
तब उन जवानो ने मिलकर इनकी हस्ती मिटाई थी।
तब जाके हमने ये आजादी पाई थी।
लेकिन आज फिर घिर चुके है ,
हम इन भ्ष्टाचारो की जंजीरो में ,
कर रहे है ये खोखला , हमारे देश को बड़े पैमानों में ,
अब हमे होश में आना होगा , इन भ्र्ष्टाचारियो को सबक सीखना होगा।
लो आज हमने ये कसम खाई है ,
सुनो जालिमो,
याद करो वो इतिहास , जब इस देश में किसी ने हद पार लगाई है
तो हमारे देश के जवानो ने मिलकर उनकी हस्ती
मिटाई है।



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