Saturday, 25 June 2016

letter

पत्र

प्यारी गर्मी
        
  मैं तुम्हारी दोस्त बरसात तुम भूल गई क्या, जब भी तुम्हारा गुस्सा बरपाता है तो मैं ही आती हूँ, तुम्हे शांत करने के लिए, अरे भई, इतना भी गुस्सा क्यों ! लगता है, तुम्हे अपने आप पर बड़ा नाज है और हो भी क्यों न इतनी शक्तिशाली जो ठहरी ! जाड़े के दिनों में  तो, तुम लोगो को बड़ा याद आती हो लोग थोड़ी सी गर्माहट पाने के लिए तरसते है और इन दिनों तुम इन्हें कितना परेशान कर देती हो ! की लोगो को बिन नहाये ही नहाने का एहसास दिला देती हो मेरा मतलब,  लोग पसीने से ही हरवक्त नहाये रहते है ! तुम्हारे कहर से धरती का पानी सूख रहा है यह तक की जानवर और पेड़ पौधे भी पानी के लिए तरस रहे है ! अरे भई इतना गुस्सा मत किया करो,        कभी अपनी जुल्फों पर काली घटा छाने दिया करो  , सूरज की हलकी लालिमा वाली बिंदी   माथे पर  लगाया करो , गले में फूलो से लदे  पेड़ पौधे सजाया करो ,और सर पर इन्द्रधनुष का ताज और ठंडी हवाओ  का चादर तभी तो  लगोगी एकदम सुन्दर !मुझे पता है की तुम मेरी बात न मानोगी, बड़ी हठी जो ठहरी !
       आशा करती हूँ, की तुम मुझसे जल्दी मिलने आओगी !                                        
                                        तुम्हारी दोस्त बरसात                                      

Saturday, 15 August 2015

जश्न -ए -आजादी 



आजादी हमने अपने प्यारो के खून से पाई है ,
इस आजादी के लिए हमारे अपनों ने छाती पर कई गोलिया खाई है। 

जब अंग्रेजो ने हम हिन्दुस्तानियो पर कई गोलिया बरसाई थी ,
भूल गए क्या , तब   अपनों ने मिलकर खून की होली मनाई थी। 

इन जालिमो ने जाने कितनो को फासिया चढाई थी ,
तब उन जवानो ने मिलकर इनकी हस्ती मिटाई थी। 

तब जाके हमने ये आजादी पाई थी।

 लेकिन आज फिर घिर चुके है ,
हम इन भ्ष्टाचारो की जंजीरो में ,

कर रहे है ये खोखला , हमारे देश को  बड़े पैमानों में ,
अब हमे होश में आना होगा , इन भ्र्ष्टाचारियो को सबक सीखना होगा। 

लो आज हमने ये कसम खाई है ,

सुनो जालिमो, 
याद करो वो इतिहास , जब इस देश में किसी ने  हद पार लगाई है 

तो हमारे देश के जवानो ने मिलकर उनकी हस्ती 
मिटाई है। 

                     







15 August

मुबाकें आजादी 


जब सभी धर्म के लोग अपने अपने मजहब के त्यौहारो को मानते है तो क्यों न हम सब मिलकर उन्ही त्यौहारो की तरह देश की आजादी का दिन मनाये क्यों रखे किसी से भेदभाव कुछ लोग जो हमारे समाज में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई का ताता  लगाये रहते है असल में वो लोग अपने मजहब पर इल्जाम लगाते है हम एक वतन है। ये सब जानते है। पर ऐसा क्यों कुछ लोग मजहब के नाम पर एक दूसरे का नामो  निशान मिटाने को तैयार हो जाते है।  जब हमारा देश उन फिरंगियो की बेड़ियों में फसा हुआ था। जाने कितने जुल्म  उन लोगो ने हम पर बरसाए थे।  तब किसी ने ये नहीं सोचा होगा की हम इस धर्म के है या इस मजहब के सबके मन में एक जूनून   था  आजादी का।  अपने मुल्क पर मिट जाने को तैयार उस वक़्त जाने कितनो की साँसे थमी थी।  तब हमे खुली हवाओ में सॉस  लेने का मौका मिला  था। तो क्यों आज हम अपने मजहब के नाम पर इस तरह लड़े जा रहे है अपने इस धर्म और मजहब की जंजीरो से आजाद होकर सभी को एक साथ मुबारकें आजादी की बधाई देनी होगी। 






जय हिन्द 
जय भारत 







Tuesday, 11 August 2015

मेरे पापा 



मैं और मेरे पापा हर ख्वाब में पापा का सर गर्व से ऊचा करने की चाह पर क्या ऐसा हो पाया  बचपन में न गोद  में खिलाया और न प्यार से सहलाया  पापा की  तीखी  नजरो ने मुझे हर पल है  डराया पापा के आते ही ख़ुशी का एक  पल भी नजर न  आया।   बस  कुछ ऐसी ही  मेरी  और मेरे पापा की कहानी----------------

वैसे तो पापा हर बेटी के जीवन का आधार होते है  पर मेरे पापा बचपन से एक डर  था कही पापा को ये बात या ऐसी शरारत बुरी न लग जाए न कभी उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाया और न कभी पढ़ाया।  दिन और रात एक जैसे लगते थे एकदम सुने और न कही हसी का एक पल कुछ ऐसे ही बीता मेरा बचपन दुसरो के पाप बेटी के बालो को सवारते है पर मेरे पापा मेरे बालो को खुला देखकर काट दिया। 
ऐसा ही एक दिन था जब वो सब मुझे बंद अँधेरे घर में छोड़ कर चले गए।  उस नन्ही सी गुड़िया का क्या कसूर , सीख गयी अंधेरो में रहना खिड़कियों और दरवाजों से बाते करना , सीख गयी जमीन पर खाना खाना , सीख गयी अकेले रहना।  पर किसी से कोई शिकायत नहीं थी।  याद है मुझे वो दिन जब  पापा ने मुझे छोटी सी गलती पर बहुत मारा था  की अब तो पापा के नाम से ही डर लगने लगा हर पल यही डर  था की कही कुछ हो न जाए ,
ऐसी ही वो घडी  थी जब पापा ने मुझे अपनी बेटी कहने से नकारा। 
उस दिन दिल से आवाज आई   क्या ऐसे ही होते है पापा 



वो यही कह रही थी मुझसे------------------------



हमारे देश के गौरव डॉक्टर अब्दुल कलाम  को हमारा सलाम 



सपने वो नहीं जो सोने के बाद आये 
सपने तो वो है जो सोने न दे 

डॉक्टर अब्दुल कलाम जिनका बचपन कई प्रकार की कठिनाइयों से बीता न जाने उन्होंने अपने जीवन में कितने कष्ट झेले पर फिर भी उनमे इतना साहस था की जो वो अपने जीवन से चाहते थे उन्होंने वो हासिल किया।  तमिलनाडु की रामेश्वरम की गलियो में हुआ था इनका जन्म बचपन से ही बड़े प्रतिभा शाली थे। उनके मन में एक दृढ विश्वास था जो वर्तमान समय के युवाओ  धुंधला सा गया है आर्थिक कठिनाइयों के वाबजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई  के लिए घर घर जाकर अखबार बेचा। उनका सपना  पायलेट  बनना था जो साकार नहीं हो सका।  शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।  कलाम जी लालटेन की  रोशनी में जीवन की रोशनी की खोज में दुबे रहते थे।  जीवन में इतनी लगन ने उन्हें अपनी मंजिल पर पंहुचा दिया।  और वे भारत के ११ वे राष्ट्रपति के पद पर शोभित हए।  और उन्होंने अपनी  इस कड़ी मेहनत और लगन   से भारत को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए कई मिशाइले  बनाई।   डॉक्टर अब्दुल कलाम जी को बच्चो से बड़ा प्रेम था।  इनका जीवन ही सबके लिए एक मिशाल थी। जो आज कल कही खोती  जा रही है  जीवन में आर्थिक और समाजिक कठिनाइया तो आती रहती है पर आज कल के किशोर और युवाओ में इतनी कम सहन शक्ति है की जीवन में कुछ घटना हो जाने पर जीवन से निराश और हताश हो जाते है और अपने उद्देश से भटक जाते है।  दृढ़  निश्चय और आत्मविश्वास की मानो एक कमी सी है  सभी एक दूसरे पर निर्भर रहना चाहते है।  डॉक्टर अब्दुल कालम जी का जीवन सघर्षो से भरा हुआ था।   कलाम जी एक अच्छे देश भक्त थे।    उनके जीवन का हर पल भारत को समर्पित था। वो चाहते थे की  भारत के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करके जिंदगी की हर तरक्की और  हर मुकाम हासिल करे।  डॉक्टर कलाम  जी ने अपनी पुस्तक " भारत " में भारत देश को २०२० तक  आधुनिक बनाने की योजना बनाई थी।  कलाम जी ने  कहा   था की उनकी मृत्यु के दिन अवकाश घोषित न किया जाए उनका हर कदम भारत देश को एक नई दिशा दे गया।   भारत देश को उन्होंने एक न्यूक्लिअर देश बना दिया।  वो भारत के एक अच्छे नागरिक साबित हुए।   भारत के इस अनमोल रत्न को भारत देश ने खो दिया। 


खुदा ने ये वादा नहीं किया , की  आसमान नीला होगा 
सुकून की राहो में दुःख का नजारा न होगा 
जीवन में नए सवेरे तो आएंगे 
 पर उन सवेरो के साथ घना अँधेरा न होगा
 
     





Friday, 8 May 2015

happy mother day

माँ मेरी माँ प्यारी माँ मम्मा 

जिंदगी की शुरुआत माँ से हुई 
आखे खोलने पर माँ का चेहरा नजर आता है 

 माँ की उँगली पकड़ कर चलना और 
माँ का प्यार से सहलाना याद आता है 

थक कर घर आने के बाद  माँ का खाना 
निकाल कर अपने हाथो से खिलाना याद आता है

घर से बाहर बाहर जाने पर 
माँ का दस बार फ़ोन करना याद आता है 

 सामान न मिलने पर घर को फैला देना 
और  माँ पर चिल्लाना  और 
 माँ का प्यार से बोलना याद आता है 

स्कूल के लिए उठाना और बस 
पांच मिनट कहकर सो जाना याद आता है 

पेपर के समय पढ़ना और पढ़ते वक़्त 
प्यारी सी चाय बना कर ले आना याद आता है 

रात को बस युही सो जाना माँ का 
चादर  उड़ाकर  हाथो से सहलाना याद आता है 

 दुःख  के समय  माँ  का आँचल पकड़कर 
रोना याद आता  है  

गलतिया करने के बाद पापा की 
डॉट  से  बचाना  याद आता है 

 क्यों इतने बड़े   हो गए हम की माँ   
याद करते ही पुराना बचपन याद आता है। 

i love my mom  

monika 















Monday, 20 April 2015

aansu

आँसू 

आँसू  भी  बड़े  अजीब होते है कभी ख़ुशी में तो कभी गम में आते है  ख़ुशी में आते तो हमेशा याद आते है पर  जब   गम में आते है तो उनको  याद करने का मन नही करता जब कोई तकलीफ अंदर ही अंदर होती है  तब बड़ी अजीब सी फीलिंग होती है  मन तो करता है आज जी भर के इन आसुओ को निकाल  दू पर इन आसुओ  से किसी और को दुखी नहीं कर सकते।  जब  भी रोने का मन करता है तो  हमेशा  कोना देखना पड़ता  फिर माँ भी पूछती है क्या  हुआ फिर  किसी तरह से हम कह देते है कुछ नही माँ सब एक दम मस्त है और जब दोस्तों की नजर पड़ती है तो वो पूछते है क्या हुआ मूड क्यों खराब है बस यही कह देते है नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है       
 पर क्या वाक़ई में ऐसा होता है   हम कुछ तो कहना चाहते है ;अपने मन की सारी बात निकाल देना चाहते है बस दिल में एक दर्द  सा  रहता है  किसी के गले लग कर  बयाँ   करना चाहते है पर बस यूही रुक जाते है उन आसुओ को अपनी आखो में छुपा कर एक स्माइल सा  लुक  देते हुए आगे बढ़ जाते है   किसी को पता नहीं चल पाता की उस हँसते चेहरे के पीछे एक दर्द से भरा चेहरा है जो सबसे छुपा है बस रात में याद आती है वो सारी बाते  जिन्हे बस यूही  भूलना नही चाहते वो चाहे जितना भी दर्द देती हो फिर वो ही सॉन्ग   बजता है जिसमे हम खुद को पाते है 



 आंसू  भी बड़े अजीब चीज़ है 
जिनके पास नही वो बड़े खुशनसीब  है 
 दुनिया के किस्से भी अजीब है 
खुशी  मिले या गम सबका अपना अपना नसीब है