Saturday, 15 August 2015

जश्न -ए -आजादी 



आजादी हमने अपने प्यारो के खून से पाई है ,
इस आजादी के लिए हमारे अपनों ने छाती पर कई गोलिया खाई है। 

जब अंग्रेजो ने हम हिन्दुस्तानियो पर कई गोलिया बरसाई थी ,
भूल गए क्या , तब   अपनों ने मिलकर खून की होली मनाई थी। 

इन जालिमो ने जाने कितनो को फासिया चढाई थी ,
तब उन जवानो ने मिलकर इनकी हस्ती मिटाई थी। 

तब जाके हमने ये आजादी पाई थी।

 लेकिन आज फिर घिर चुके है ,
हम इन भ्ष्टाचारो की जंजीरो में ,

कर रहे है ये खोखला , हमारे देश को  बड़े पैमानों में ,
अब हमे होश में आना होगा , इन भ्र्ष्टाचारियो को सबक सीखना होगा। 

लो आज हमने ये कसम खाई है ,

सुनो जालिमो, 
याद करो वो इतिहास , जब इस देश में किसी ने  हद पार लगाई है 

तो हमारे देश के जवानो ने मिलकर उनकी हस्ती 
मिटाई है। 

                     







15 August

मुबाकें आजादी 


जब सभी धर्म के लोग अपने अपने मजहब के त्यौहारो को मानते है तो क्यों न हम सब मिलकर उन्ही त्यौहारो की तरह देश की आजादी का दिन मनाये क्यों रखे किसी से भेदभाव कुछ लोग जो हमारे समाज में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई का ताता  लगाये रहते है असल में वो लोग अपने मजहब पर इल्जाम लगाते है हम एक वतन है। ये सब जानते है। पर ऐसा क्यों कुछ लोग मजहब के नाम पर एक दूसरे का नामो  निशान मिटाने को तैयार हो जाते है।  जब हमारा देश उन फिरंगियो की बेड़ियों में फसा हुआ था। जाने कितने जुल्म  उन लोगो ने हम पर बरसाए थे।  तब किसी ने ये नहीं सोचा होगा की हम इस धर्म के है या इस मजहब के सबके मन में एक जूनून   था  आजादी का।  अपने मुल्क पर मिट जाने को तैयार उस वक़्त जाने कितनो की साँसे थमी थी।  तब हमे खुली हवाओ में सॉस  लेने का मौका मिला  था। तो क्यों आज हम अपने मजहब के नाम पर इस तरह लड़े जा रहे है अपने इस धर्म और मजहब की जंजीरो से आजाद होकर सभी को एक साथ मुबारकें आजादी की बधाई देनी होगी। 






जय हिन्द 
जय भारत 







Tuesday, 11 August 2015

मेरे पापा 



मैं और मेरे पापा हर ख्वाब में पापा का सर गर्व से ऊचा करने की चाह पर क्या ऐसा हो पाया  बचपन में न गोद  में खिलाया और न प्यार से सहलाया  पापा की  तीखी  नजरो ने मुझे हर पल है  डराया पापा के आते ही ख़ुशी का एक  पल भी नजर न  आया।   बस  कुछ ऐसी ही  मेरी  और मेरे पापा की कहानी----------------

वैसे तो पापा हर बेटी के जीवन का आधार होते है  पर मेरे पापा बचपन से एक डर  था कही पापा को ये बात या ऐसी शरारत बुरी न लग जाए न कभी उन्होंने मुझे प्यार से गले लगाया और न कभी पढ़ाया।  दिन और रात एक जैसे लगते थे एकदम सुने और न कही हसी का एक पल कुछ ऐसे ही बीता मेरा बचपन दुसरो के पाप बेटी के बालो को सवारते है पर मेरे पापा मेरे बालो को खुला देखकर काट दिया। 
ऐसा ही एक दिन था जब वो सब मुझे बंद अँधेरे घर में छोड़ कर चले गए।  उस नन्ही सी गुड़िया का क्या कसूर , सीख गयी अंधेरो में रहना खिड़कियों और दरवाजों से बाते करना , सीख गयी जमीन पर खाना खाना , सीख गयी अकेले रहना।  पर किसी से कोई शिकायत नहीं थी।  याद है मुझे वो दिन जब  पापा ने मुझे छोटी सी गलती पर बहुत मारा था  की अब तो पापा के नाम से ही डर लगने लगा हर पल यही डर  था की कही कुछ हो न जाए ,
ऐसी ही वो घडी  थी जब पापा ने मुझे अपनी बेटी कहने से नकारा। 
उस दिन दिल से आवाज आई   क्या ऐसे ही होते है पापा 



वो यही कह रही थी मुझसे------------------------



हमारे देश के गौरव डॉक्टर अब्दुल कलाम  को हमारा सलाम 



सपने वो नहीं जो सोने के बाद आये 
सपने तो वो है जो सोने न दे 

डॉक्टर अब्दुल कलाम जिनका बचपन कई प्रकार की कठिनाइयों से बीता न जाने उन्होंने अपने जीवन में कितने कष्ट झेले पर फिर भी उनमे इतना साहस था की जो वो अपने जीवन से चाहते थे उन्होंने वो हासिल किया।  तमिलनाडु की रामेश्वरम की गलियो में हुआ था इनका जन्म बचपन से ही बड़े प्रतिभा शाली थे। उनके मन में एक दृढ विश्वास था जो वर्तमान समय के युवाओ  धुंधला सा गया है आर्थिक कठिनाइयों के वाबजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई  के लिए घर घर जाकर अखबार बेचा। उनका सपना  पायलेट  बनना था जो साकार नहीं हो सका।  शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था।  कलाम जी लालटेन की  रोशनी में जीवन की रोशनी की खोज में दुबे रहते थे।  जीवन में इतनी लगन ने उन्हें अपनी मंजिल पर पंहुचा दिया।  और वे भारत के ११ वे राष्ट्रपति के पद पर शोभित हए।  और उन्होंने अपनी  इस कड़ी मेहनत और लगन   से भारत को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए कई मिशाइले  बनाई।   डॉक्टर अब्दुल कलाम जी को बच्चो से बड़ा प्रेम था।  इनका जीवन ही सबके लिए एक मिशाल थी। जो आज कल कही खोती  जा रही है  जीवन में आर्थिक और समाजिक कठिनाइया तो आती रहती है पर आज कल के किशोर और युवाओ में इतनी कम सहन शक्ति है की जीवन में कुछ घटना हो जाने पर जीवन से निराश और हताश हो जाते है और अपने उद्देश से भटक जाते है।  दृढ़  निश्चय और आत्मविश्वास की मानो एक कमी सी है  सभी एक दूसरे पर निर्भर रहना चाहते है।  डॉक्टर अब्दुल कालम जी का जीवन सघर्षो से भरा हुआ था।   कलाम जी एक अच्छे देश भक्त थे।    उनके जीवन का हर पल भारत को समर्पित था। वो चाहते थे की  भारत के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करके जिंदगी की हर तरक्की और  हर मुकाम हासिल करे।  डॉक्टर कलाम  जी ने अपनी पुस्तक " भारत " में भारत देश को २०२० तक  आधुनिक बनाने की योजना बनाई थी।  कलाम जी ने  कहा   था की उनकी मृत्यु के दिन अवकाश घोषित न किया जाए उनका हर कदम भारत देश को एक नई दिशा दे गया।   भारत देश को उन्होंने एक न्यूक्लिअर देश बना दिया।  वो भारत के एक अच्छे नागरिक साबित हुए।   भारत के इस अनमोल रत्न को भारत देश ने खो दिया। 


खुदा ने ये वादा नहीं किया , की  आसमान नीला होगा 
सुकून की राहो में दुःख का नजारा न होगा 
जीवन में नए सवेरे तो आएंगे 
 पर उन सवेरो के साथ घना अँधेरा न होगा
 
     





Friday, 8 May 2015

happy mother day

माँ मेरी माँ प्यारी माँ मम्मा 

जिंदगी की शुरुआत माँ से हुई 
आखे खोलने पर माँ का चेहरा नजर आता है 

 माँ की उँगली पकड़ कर चलना और 
माँ का प्यार से सहलाना याद आता है 

थक कर घर आने के बाद  माँ का खाना 
निकाल कर अपने हाथो से खिलाना याद आता है

घर से बाहर बाहर जाने पर 
माँ का दस बार फ़ोन करना याद आता है 

 सामान न मिलने पर घर को फैला देना 
और  माँ पर चिल्लाना  और 
 माँ का प्यार से बोलना याद आता है 

स्कूल के लिए उठाना और बस 
पांच मिनट कहकर सो जाना याद आता है 

पेपर के समय पढ़ना और पढ़ते वक़्त 
प्यारी सी चाय बना कर ले आना याद आता है 

रात को बस युही सो जाना माँ का 
चादर  उड़ाकर  हाथो से सहलाना याद आता है 

 दुःख  के समय  माँ  का आँचल पकड़कर 
रोना याद आता  है  

गलतिया करने के बाद पापा की 
डॉट  से  बचाना  याद आता है 

 क्यों इतने बड़े   हो गए हम की माँ   
याद करते ही पुराना बचपन याद आता है। 

i love my mom  

monika 















Monday, 20 April 2015

aansu

आँसू 

आँसू  भी  बड़े  अजीब होते है कभी ख़ुशी में तो कभी गम में आते है  ख़ुशी में आते तो हमेशा याद आते है पर  जब   गम में आते है तो उनको  याद करने का मन नही करता जब कोई तकलीफ अंदर ही अंदर होती है  तब बड़ी अजीब सी फीलिंग होती है  मन तो करता है आज जी भर के इन आसुओ को निकाल  दू पर इन आसुओ  से किसी और को दुखी नहीं कर सकते।  जब  भी रोने का मन करता है तो  हमेशा  कोना देखना पड़ता  फिर माँ भी पूछती है क्या  हुआ फिर  किसी तरह से हम कह देते है कुछ नही माँ सब एक दम मस्त है और जब दोस्तों की नजर पड़ती है तो वो पूछते है क्या हुआ मूड क्यों खराब है बस यही कह देते है नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है       
 पर क्या वाक़ई में ऐसा होता है   हम कुछ तो कहना चाहते है ;अपने मन की सारी बात निकाल देना चाहते है बस दिल में एक दर्द  सा  रहता है  किसी के गले लग कर  बयाँ   करना चाहते है पर बस यूही रुक जाते है उन आसुओ को अपनी आखो में छुपा कर एक स्माइल सा  लुक  देते हुए आगे बढ़ जाते है   किसी को पता नहीं चल पाता की उस हँसते चेहरे के पीछे एक दर्द से भरा चेहरा है जो सबसे छुपा है बस रात में याद आती है वो सारी बाते  जिन्हे बस यूही  भूलना नही चाहते वो चाहे जितना भी दर्द देती हो फिर वो ही सॉन्ग   बजता है जिसमे हम खुद को पाते है 



 आंसू  भी बड़े अजीब चीज़ है 
जिनके पास नही वो बड़े खुशनसीब  है 
 दुनिया के किस्से भी अजीब है 
खुशी  मिले या गम सबका अपना अपना नसीब है


feature

पहिया 

पहिया क्या  कभी  किसी ने ये सोचा है की एक पहिये का हमारी जिंदगी में
ज़िन्दगी 
क्या इम्पोर्टेन्ट है पहिये के द्वारा ही हम एक जगह से दूसरी जगह पर बड़ी आसानी से पहुँच जाते है पर उसकी तरफ बस युही ध्यान नहीं देते जिस प्रकार पहिया घूमता है ठीक उसी प्रकार हमारी जिंदगी का चक्र  चलता है।  एक पहिये को   न जाने कितने मोड़   मिलते है और न चाहते हुए भी उसे उन मोड़ से गुजरना पड़ता है ऐसे ही हमारी कुछ जिंदगी है हमे भी अनेक मोड़ मिलते है और हमे  भी उन मोड़ो पर न चाहते हुए भी चल देते  है कभी घर के लिए तो कभी इश्क़ के लिए बिना अंजाम जाने बस युही उन रास्तो के लिए निकल पड़ते है  जिनकी राहे हमसे बिल्कुल अनजान होती है  और जब हम वहा की हवा जब  से रूबरू होते है   तो एक  अलग सी फीलिंग होती है पहिया भी ऐसे ही कई मोड़ पर गुजरा होगा   और उसने भी सभी जगह को महसूस किया होगा पहिया रूपी चक्र हमारी जिंदगी से जुड़ा हुआ है जिस  तरह हम  पुराने रास्तो से गुजर कर नए रास्तो की तरफ चल देते है   उन रास्तो पर मिलने  वाले सभी चीज़ो को महसूस करते है  और देखते ही देखते वो हमारे लिए यादे  बन जाती है और समय के साथ सभी यादे धुँधली पड़ जाती  है और उन सभी   बातो  को महसूस करके  ख़ुशी का अनुभव करते है  और अच्छी यादो को संजो  कर रख लेते है  जिस तरह पहिये  को  अपनी मंजिल का पता नहीं होता  पर एक न एक दिन  वह  अपनी मंजिल पर पहुंच जाता है और सड़को की राहो पर  चलते चलते  घिस कर  टूट जाता है ठीक उसी तरह  हम जिंदगी की राहो में  भटकते  भटकते   अपनी मंजिल पर पहुंच जाते है और एक दिन इस  शरीर को छोड़ कर मिटटी में मिल जाते है मुझे लगता है शायद आप समझ पाए होंगे  जिंदगी और पहिये की इस अनोखी कहानी को  की किस तरह पहिया  और  जिंदगी  चलते है  और कितनी मुस्किलो का सामना करते हुए  अपनी मंजिल पर पहुँचते है

Wednesday, 8 April 2015

feature

झाड़ू 

झाड़ू  भी  बड़ी अजीब चीज़ है न  सोचने और समझने के लिए वैसे  तो
 हम लोग इतने बिजी रहते है  की सबके पास टाइम ही कहा है इन  सब चीज़ो के बारे में  धयान   देने    के  लिए इस भागती हुई  जिंदगी  में  हम सब झाड़ू जैसी अनेक चीज़ो पर ध्यान नहीं देते सच  तो ये भी है  की  झाड़ू के बिना  हम  सब का घर कूड़ा घर  बन  जायेगा।
                    जिस प्रकार  हम घर को साफ़ और सुन्दर  बनाये रखने के लिए झाड़ू का  प्रयोग  करते  है पर क्या हम समाज   में पल रही उस गन्दगी के बारे सोचते है जो हमारे समाज को अंदर ही अंदर  खोखला  कर   रही है.. जिस तरह से हम अपना घर  साफ़ कर कूड़ा बाहर लगा देते है    ठीक  उसी तरह समाज में हो रहे  भरष्टाचार    अनन्याए  के प्रति अपनी आँखे बंद कर लेते है। आज लोग अपने और अपनों के बारे में सोचते है जिस तरह से हमने झाड़ू को अपने घर की सीमा में बांध रखा है  ठीक उसी तरह समाज हमे संस्कीरति का हवाला  देते हुए  पुरानी  बातो की जंजीरो से जकड रखा है  हम   जैसे युवाओ को इन समाज की गन्दगी को साफ़ करने के लिए  झाड़ू रूपी एकता  उत्पन्न  करनी होगी जिससे  हम समाज की अनचाही मांगो को नकार सके और  समाज   में पनप रही गन्दगी का सफाया कर सके पर क्या ऐसा हो पायेगा  या नही  समाज में हो रहे अत्याचार और रैप  जैसे अपराधो  को गंभीरता से  लेते है इन अपराधो को देखते और समझते है  पर कुछ न कर पाने की वजह से बस युही भूल जाते है  क्योकि हमारी बातो को और आक्रोश  को दबाने के लिए एक  नही हजारो बैठे हुए है  जिनके चुटकी बजाते ही सारा खेल ख़त्म हो जाता है और सब अपनी जिंदगी में फिर से व्यस्त हो जाते है एक एक  दिन करके पूरा साल निकल जाता है   पर  समाज में कुछ नया पन   महसूस नही होता आज हम बदलतै हुए समाज में रह रहे    है    पर कुछ बदला नही न  हां  कुछ  चीज़े है जो बदल गई है जैसे हमारे  रहने के ढंग   पर   हम सभी को  मिलकर एक नई    सोच बनानी होगी जिससे हम समाज में रह रहे लोगो की  उम्मीद बन सके जो लोग अभी भी न्याय की आस लगा कर बैठे हुए है  जिस तरह से हम घर की   सफाई कर  पुरे   घर का वातावरण    स्वछ कर देते है   ठीक  उसी तरह से हमे समाज की    हर बुराई का सफाया कर समाज का वातावरण को स्वच्छ  कर सकते है 
                               ऐसा करके   हम  समाज में आने वाले नई जनरेसन को समाज की  नई  किरण से वाक़िफ़ करा सकते है  और बता सकते है की  कोई भी चीज़ छोटी नहीं होती    समाज का हर एक इंसान इम्पोर्टेन्ट है जिस तरह से  झाड़ू  का महत्त्व है ठीक उसी तरह हर छोटे बड़े सभी व्यक्ति का अस्तित्व है। 

Sunday, 8 March 2015

INTERVIEW





शिखा सक्सेना जो लखनऊ विश्वविधायलय के मास कम्युनिकेशन की एक मेधावी छात्रा है जिनके बारे में सभी को जानने की बड़ी उत्सुक्ता है तो आइये जानते है   इनकी जिंदगी के बारे में और इनके जिंदगी जीने के नजरिये को और  पूछते है इनसे जुड़े कुछ सवाल -
 हां तो शिखा जी ये बताइये आपने एम जे एम सी जॉइन करने के लिए क्यों सोचा ?
मेरा इंटर से ये सपना था की में मिडिया में काम करू और समाज के हर तबके को सामने लाऊ  पर  मुझे इस कोर्स की पूरी जानकारी न होने के कारण मैंने नवयुक से  बी ऐ  किया फिर  कुछ दोस्तों से इसके बारे में  जानकारी ली तभी मैंने ये  निश्चय किया की मुझे लखनऊ विश्वविद्यालय में इस कोर्स के लिए दाखिला लेना है और अपना सपना पूरा करना है।

आप मास कम्युनिकेशन के किस फील्ड में जाना चाहेंगी ? 
वैसे तो मैंने  कुछ निश्चय नही किया है पर में एक रिपोटर बनना चाहूंगी।

शिखा जी अपने वयक्तित्व के बारे में कुछ बताइये ?
मैं अपने बारे में यही बताना  चाहूंगी  की मैं अपने विचार को किसी पर  थोपती नही हूँ।  लोगो को उनके वयक्तित्व के साथ स्वीकारती हूँ अधिक तर ऐसा होता है अपने से जुड़े सभी लोगो से बहुत सी उम्मीदे  पाले बैठे है जैसे मेरे माता पिता सबसे ज्यादा  ख्याल रखे यानी हर काम वैसा जैसा  हम  चाहे   पर लोग ये नहीं सोचते सबका अपना अलग वयक्तित्व है अतः सभी को अधिकार है की वह अपना काम अपने तरीके से करे।

 आप जिंदगी की मुश्किलो से कैसे सामना करती है ?
हम जिंदगी के लिए ढेर सारे सपने  संजोते है उनमे से  कुछ पुरे   होते  है और कुछ अधूरे रह जाते हैसपनो को पूरा न होने का बोझ  मन में  हो तो अंसंतुष्टि  घेरती है और चिड़चिड़ापन कब   हमारे स्वभाव का हिस्सा हो जाता है हमे  पता नही चलता।  जिंदगी में कई बाते हमारे मन मुताबिक नही होती ,   वो भी मुश्किलो से भर देती है  धीरे धीरे हमारी सोच नकारात्मक होने लगती है  यह समय सबसे चुनौती  भरा   होता है  पर मैं हर समस्या का समाधान बहुत सकारात्मकता से करती हूँ क्यों न जिंदगी जीने के  नजरिये में   ऐसे  परिवर्तन कर जो हमे सकरात्मकता की ऊर्जा से भर दे।

शिखा जी  क्या आप लोगो के साथ जल्दी घुल मिल जाती है ?
हां मुझे लोगो से मिलना अच्छा लगता है और मैं उनके तौर तरीके तथा उनकी  जिंदगी जीने के नजरिये को जानना   अच्छा लगता है। 

 शिखा  जी ये बताइये आपको कहा घूमना अच्छा लगता है और किसके साथ में ?
वैसे   तो मुझे कही बाहर जाना अच्छा लगता है मेरी  पसंदीदा जगह  पार्क है मुझे पेड़ पोधे अच्छे  लगते है और  मुझे  माँ पापा पापा के साथ जाना अच्छा लगता है। 

आप अपने  बचपन के बारे में कुछ बताइये ?
  मेरा बचपन बहुत अच्छा रहा है  माँ  पापा  सबसे  ज्यादा प्यार करते है तो मुझे कभी कुछ ऐसा सहना  और देखना नही पड़ा  मुझे तब सबसे ज्यादा  ख़ुशी मिली    जब  मैंने १२  क्लास , में  टॉप किया था वो मेरी जिंदगी का सबसे ख़ुशी का पल था। 

 आप ऐसा  क्या चाहती है जो  आपकी जिंदगी में दोबारा न आये ?
ऐसी कोई बात अभी तक हुई नहीं है मेरे  ग्रेजुएशन  १ ईयर में कॉलेज वालो की कुछ गलती के कारण  मेरा एडमिट कार्ड मुझे नहीं मिल पाया था तब में बहुत परेशान हो गई थी तो मैं  यही चाहती हूँ की मेरे साथ ऐसा दोबारा न हो। 

 आपको क्या लगता है  की ऑनलाइन रहना कितना जरूरी है ?
ऑनलाइन  गतिविधिया जरूरी  है पर  इसमें जरुरत से ज्यादा लिप्त रहना सेहत के लिए घातक हो सकता है  आज जमाना कंप्यूटर  का है और बदलते वक़्त के साथ  कंप्यूटर  पर हमारी निर्भरता बढ़ती  रही है पढ़ाई से लेकर  मनोरंजन तक  स्पोट्स से लेकर साइंस  टेक्नोलॉजी तक भाषा से लेकर टिकटिंग तक क्षेत्र जो भी हो कंप्यूटर का इस्तेमाल किसी न किसी रूप में होता है स्टूडेंट के पास इंटरनेट के रूप में एक महत्वपूर्ण खजाना है किसी  भी  विषय  की जानकारी बस  एक क्लिक  काफी है दिन  रात कंप्यूटर  पर आखे  गड़ाए  रहना और  गलत  पोश्चर के  कारण हड्डीओं  जुडी बीमारिया हो सकती है  ऐसे में जरुरत की बात यह है की पढ़ाई के  लिए  जितना  जरूरी है कंप्यूटर का उतना इस्तेमाल करे। 

 फेसबुक के बारे आपकी  क्या  राय है ?
फेसबुक   एक  ऐसा माध्यम जो सभी लोगो को अपनों से दूर कर रहा है  बस लोगो का एक  तरफ़ा चरित्र  दिखा रहा है  जिसके कारण  कई रिश्ते बन रहे है और कई बिगड़ भी रहे है। 

खाली समय में आप क्या  करती है ?
 मुझे लिखना बहुत पसंद है  अधिकतर  जब में फ्री होती हूँ   तब में अपनी डायरी  लिखती हूँ। 

जैसा की अभी  वोर्ल्ड्कप् चल रहा है आपको क्या लगता है  की टीम इंडिया वोर्ल्ड्कप् भारत ला  सकती है ?
टीम इंडिया ने लगातार  चारो मैच  पर फतह हासिल की है इससे  और  उम्मीद बढ़  जाती है की टीम इंडिया  वोर्ल्ड्कप् भारत ल सकती है। 

वर्तमान  समय में बनाई जा  रही फिल्मे हमारे समाज पर कैसा प्रभाव डाल रही है ?
आज के समय में जो फिल्मे बनाई जाती है वो केवल मनोरंजन के  लिए  होती  है  इन फिल्मो में किसी प्रकार के तथ्य नही होते जो समाज को सोचने पर मजबूर कर दे। 

होली के पर्व के बारे में आपके क्या विचार है ?
होली रंगो का  त्यौहार है यह संसार रंगो का से भरा हुआ है  और  लोगो की भावनाए  भी विभिन्न रंगो से जुडी है जहा एक और होली का त्यौहार पूर्व संध्या पर होलिका दहन जो बुराई  पर अच्छाई   की जीत   का प्रतिक  है। 



इसी के साथ अापसे सवालो का फलसफा यही पर समाप्त होता है आपका अपना कीमती वक़्त देने के लिए   बहुत -बहुत शुक्रिया।  


                                                                                                                                            मोनिका   

  

         
    
      





  

Saturday, 21 February 2015

जिंदगी कुछ कहती है 


कभी हसाती है , कभी रुलाती है 
कभी भूली बातो को याद  दिलाती है 
जिंदगी कुछ कहती है 
कभी डराती है , कभी लड़ना सिखाती है 
जिंदगी के गमो को भूल जाना बतलाती है 
जिंदगी कुछ कहती है 
प्यार करना सिखाती है ,दर्द सहना बताती है 
दुखो  में पेड़ो की छाँव  सहलाती है 
जिंदगी कुछ कहती है 
कब थे  अपनों  से करीब  , और कब हुए अपनों से दूर 
सभी पलो को महसूस  कराती है 
 जिंदगी कुछ कहती है 
दुनिया की जद्दोजहद से भिड़ना सिखाती है 
और एक दिन मौत  के  करीब ले आती है 
 जिंदगी कुछ कहती  है 
  







                                   

Friday, 13 February 2015

shikayat

शिकायत

मुझे शिकायत है आज के दोहरी सोच वाले समाज से
आज के समाज मे लड़कियों को सभी अधिकार दिए जाने लगे है   लेकिन उन्हें  अधिकारों की सीमाओ की बेड़िओ से जकड  दिया गया  है  वैसे तो  कहने को हमारा समाज  खुला हुआ है पर आज भी  यहाँ  लड़कियों को लड़को से कम  समझा जाता है लड़को को सारी आजादी  है पर वही लड़कियों को समय  के दायरे में बांध दिया  है , आखिर क्यों समाज के सभी नियम ,कानून , रीति रिवाज लड़कियों के लिए बनाये जाते है उन्हें ही ये बताया जाता है  की उन्हें ही घर परिवार का  मान   सम्मान बना के रखना है  उन्हें  अपनी ज़िंदगी से से समझोते के लिए मजबूर किया जाता है / लड़के लड़कियों को परेशान करते है उनकी भावनाओ को आहत  है फिर भी समाज सारा दोष  लड़कियों पर ड़ाल दिया जाता  है पेरेंट्स लड़कियों  अगर आजादी देने की कोशिश  भी  करे लेकिन हमारा समाज  उन्हें ये करने नहीं देगा  पेरेंट्स भी  ये सोचने पर मजबूर हो जाते है की  हमे समाज की  हिसाब  से अपनी लड़कियों को पलना  होगा /  जब किसी  लड़की की शादी  होती है उस समय  भी लड़कियों को ही  सभी रस्मे निभानी पड़ती है   लड़की के घरवालो को भी  उन सब  के सामने सर झुकाना  पड़ता है  इसकी वजह समाज है समाज ही लड़के के घरवालो को छूट है की वह लड़की के घरवालो  से कुछ भी करवा सकते है ताजुब की बात तो तब होती है   जब एक लड़की के पिता होने के बावजूद भी वह दूसरी लड़की   की इज्जत नहीं करता उसे अपने घर की नौकरानी समझता है /
                                           कल तक की एक आजाद पंछी आज किसी के घर के पिंजड़े में कैद हो जाती है कल खुले आसमान में  उड़ना  चाहती थी लेकिन उसको आसमान को ठीक तरह से देखना भी नसीब नहीं  होता एक एक करके पूरा साल निकल जाता है लेकिन ज़िंदगी  कुछ नयापन  महसूस  नही होता   क्योकि वह घर परिवार की ख़ुशी  और दुसरो  की चिंता में  इस कदर व्यस्त हो जाती है  की  अपने लिए वक्त ही नहीं बचता  अपनी   जरुरत अपनी पसंद न पसंद को कभी समझने की कोशिश नहीं करती कभी अपनी सखियो से कहती थी "मैं अपनी  फेवरिट हूँ"  दुसरो की  पसंद की चीज़ो  में उलझ जाती है  कभी हवा से  बाते करती  उसे महसूस करती  लेकिन  आज  हवा आने पर खिड़कियों  बंद करने में लग जाती ज़िन्दगी की सभी तकलीफो को झेलने के लिए तैयार रहती है  हमारा समाज उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर देता है इतना सब करने के बाद भी उन्हें वो सम्मान प्यार नहीं मिलता किसी के  चेहरे परं खुशी  देखने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है लेकिन अपनी ख़ुशी का क्या आखिर क्यों समाज सभीबलिदान लड़कियों से मागता है क्यों लोग नही समझते की उनकी भी कुछ मांगे है उन्हें भी रहने का हक़ है हवा को महसूस करने का आसमान को छु जाने का हक़ है लेकिन अब समाज को बदलना होगा उन्हें भी आजादी देनी होगी खुद की पहचान होगी और समाज उस पर गर्व करेगा और वह अपने अनुसार ज़िंदगी जियेगी 

                                                                                                                                 मोनिका